Monday, 26 December 2011

चले हम संत से संता की और .....



दद्दू  कैसे हो ..सुना है आजकल ब्रजेश भाई अमेरिका चले गये हे ..मेने इधर से पूछा I

हाँ..तुने सही सुना हे ..आठ महीने हो गये हैं उसे गये. अभी तुजसे पहले उससे ही बात हो रही थी  ..दद्दू फ़ोन पे बोले  I

"अच्छा और क्या हाल हैं उनके ...क्या कह रहे थे ब्रजेश भाई" मेने उत्सुकता के साथ पूछा  I
बता रहा था कल घुमने गये थे रात में ..कुछ किसमस (क्रिसमस ) हे वहा पे ...बोल रहा था  बड़े बड़े संत (असलियत में संता ) आये हे सुना हे अमेरिका में ..." भाई ये अच्छा हे ...अमेरिका में भी संतो के दर्शन हो जाते हैं" दद्दू ख़ुशी से बोले ..में बस अन्दर से मुस्करा भर दिया और बोंला अच्छा दद्दू ये तो बताओ ब्रजेश भाई के दोनों बच्चे कहाँ हे ...वो तो यही हैं न ?
हाँ हे तो यही पर कल दिन भर घुमने गये थे ...बोलकर  गये थे .. कोई संता को देखने जा रहे हे  I  में तो परेशान हो गया हु अब इंतजार करते करते , अब तक नही लोटे हे दोनों के दोनों I
(उनकी आवाज में थोडा भारीपन था )
"फिक्र मत करो दद्दू आ जायेंगे वेसे भी घर में क्या काम  हैं घुमने दो उन्हें ..कुछ देर " ..मेने समझाते हुए  कहा  I
दद्दू बोले भाई दीपक ऐसे मुझे कोई  परेशानी नही हैं, तू भी जानता हे ..पर बात ये हे की घर पे २ दिन से बहुत  बड़े संत आये हुवे हे ..आजाते तो उनका आशीर्वाद ले लेते ..२-४  ज्ञान की बात सुन लेते  I
पर ये बच्चे समझते कहा हे....ब्रजेश को बोंला था इनसे कम से कम फ़ोन पे ही बात करले कुछ देर ..बोला अभी टाइम नही हे....संता के यहाँ  जाना हैं, देर हो रही हे  I
में क्या समझाउं अब ..बच्चे बोलते हे बाबा ...संता खूब चीजे देने आता हे.
मेने कहा बेटा कुछ एसा करो की लेने वाला आये तो तुम्हे मजा आये  ..देने वाले को देखके मजा आना तो दरिर्द्ता का सूचक हे,,,,,चले सब "संत से संता की और समृधि से दरिद्रता की और" ..कहके दद्दू ने फ़ोन और क्रिसमस की भीड़ से मुझे काट दिया  I
(some example to see the same .....  https://twitter.com/#!/fart )

क्या सिखा :----
बेहतर होगा इस बार आप बताये ......

Saturday, 24 December 2011

अपना दिल न जलाओ..अक्ल लगाओ


राजेंद्र नाम ही गलत हे उसने मुझसे कहा..मेने पूछा क्यों भाई नाम तो बड़ा सही हे ..राजा इन्द्र से बना हे तुम्हारा नाम I
"हाँ सही हे ..और इन्द्र के घर में आग भी लगने वाली हे थोड़ी देर में ..खुद में ही लगाऊंगा " राजा इन्द्र"..तुम देखते रहो बस I
मैं फिर पूछ बैठा भाई ऐसा क्या हो गया की तुम अपने घर में आग लगा रहे हो I
यार दीपक तुम्हे दीखता नही कितना कूड़ा इखत्ता हो गया हे घर में ..
मेने कहा ..तो इसे हटाने के और भी तरीके हैं I
"यही कहोगे न की साफ करलो " वो तपाक से बोल उठा .
मेने कहा हाँ कर सकते हो ...भाई ये जीतेन्द्र, रमेश और रिंकू के घर हैं न हमारे पडोस में ..वह से आता हे ये कूड़ा I
कब तक साफ करूंगा ..इसीलिए सोच रहा हु आग ही लगा देता हु आँगन में जेसे ही कूड़ा आये साफ.
मेने कहा यार तो और भी तरीके हैं इससे निज़ात पाने के I
" बोलो तुम भी अपनी राय देलो .. तुम्हारा भी मन हल्का हो जायेगा.. रायचन्दो की कमी नही हे ..चिडते हुए बोला I
में भी कहाँ मानने वाला था नेक विचार रखने से ...बोला
यार एसा कर सकते हो की
एक चारदीवारी बना लो ..कूड़ा आने का सवाल ही नही
या
एसा करो की पड़ोसियों को समझाओ की उनके घर का कूड़ा साफ करे ..आदत डाले I
और
इतने ही गुस्से में हो तो कुछ एसा करो की ..वो लोग अपने घर में आग लगाये उनके घर की गंदगी के लिए अपने घर में आग ...समझदार तो एसा नही करेंगे कभी

बाकि रुम्हारी मर्जी राजेंद्र भाई ..में चलता हु वरना घर में टाइम पे नही पहुंचा तो वहा आग लग जाएगी हेहे ...


क्या सीखा :
दोस्तों हम सब ये खूब करते हे ,,,कोई और बुरा आदमी हे तो हम परेसान  हो जाते हे..अक्सर अपने दिल में आग लगा के घूमते रहते हे ,,की फ़लाने की वजह से मेरा दिमाग गरम हो रहा हे ....में परेशान हु की वो कितना बुरा आदमी हे..क्या फर्क हे ..राजेंद्र में और हममे ..जानता हु तुम मुझे रायचंद कहोगे ..हेहे कोई नही कहलो .. पर मेरी सब राजेन्द्रो से ,,यही सलाह हे ...गेरो की गलती को लेके ..अपने घर ( दिल ) में आग न लगाओ ..अक्ल लगाओ अक्ल लगाओ ...@learn from stories ,,,
उन तनहा यादों के साथ मेरे एहसास तिनका तिनका बिखरते जाते है.
मेरी नादानी हे की करता हु कोशिश सहजने की ....जरा, कुछ,  चंद कभी हाथ आते हैं
पर फिर तेरी यादों के हसीं झोंके मेरी मुट्ठी से हर तिनका छुड़ा ले जाते हैं/
ये हरकते कभी जाने में होती हे...होती हे कभी  उन्जाने में.....कभी सुने में करते हे कभी सरेआम होती हे ..दर्द तो तब होता हैं जब इनसे तू बदनाम होटी हे ...