उन तनहा यादों के साथ मेरे एहसास तिनका तिनका बिखरते जाते है.
मेरी नादानी हे की करता हु कोशिश सहजने की ....जरा, कुछ, चंद कभी हाथ आते हैं
पर फिर तेरी यादों के हसीं झोंके मेरी मुट्ठी से हर तिनका छुड़ा ले जाते हैं/
ये हरकते कभी जाने में होती हे...होती हे कभी उन्जाने में.....कभी सुने में करते हे कभी सरेआम होती हे ..दर्द तो तब होता हैं जब इनसे तू बदनाम होटी हे ...
मेरी नादानी हे की करता हु कोशिश सहजने की ....जरा, कुछ, चंद कभी हाथ आते हैं
पर फिर तेरी यादों के हसीं झोंके मेरी मुट्ठी से हर तिनका छुड़ा ले जाते हैं/
ये हरकते कभी जाने में होती हे...होती हे कभी उन्जाने में.....कभी सुने में करते हे कभी सरेआम होती हे ..दर्द तो तब होता हैं जब इनसे तू बदनाम होटी हे ...
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