रस्ते में जाते हुए आज उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था I
कोई उसके सामने हाथ जोड़ रहा था कोई आकर दंडवत प्रणाम कर रहा था I
बंशी घबरा भी रहा था ओर एक तरफ उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना न था, क्यों की आज तक उसने सिर्फ लोगो के ताने ही सुने थे ..या खूब सारा बोझ दोय था और यही गधो की फितरत भी होती हैंI हाँ बंशी एक सीधा साधा पर मह्त्वकंशी गधा था, इसीलिए आज इतनी इज्जत पाकर उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना न था ..मन ही मन सोंच रहा था चलो आज आखिर लोगो को मेरी अहमियत का अंदाजा हो ही गया I
ऐसे ही रस्ते भर वह और ज्यादा अभिमान के साथ चलने लगा , सीना तन के , आँखे चदा के , आसमाँ में देखते हुए , अभिमान में चकनाचूर ..नशे में चूर I
कुछ देर बाद वह नदी के किनारे खड़ा था ..रास्ता खतम हो चूका था I बंशी सोंच रहा था सायद अब लोग उसकी और इज्जत करेंगे ..नहलायेंगे धुलायेंगे ..माला चढ़ाएंगे और शायद उसके पेरो में गिर के आशीर्वाद लेंगे जैसा की रस्ते भर कई लोग कर रहे थे I
पर जो हुवा वो तो बड़ा ही विस्मयकारी और हताश करने वाला था, उसके ऊपर से सारा बोझ उठा कुछ लोग नदी की और चल दिए ....अब बंशी की तरफ की तरफ कोई देख भी नही रहा था सारी इज्जत और प्रणाम अब उस उसकी पीठ से उठाये बोझ को मिल रहा था I
हाँ उसके तन पे सायद ये लोग आज किसी देवता की मुसरत बिठा क लाये थे ..और ये सारी इज्जत और प्रणाम उसी को मिल रहे थे I
बंशी को ये देर में समझ आया था ...की ये दुनिया तुम्हे नही तुम्हारे द्वारा उठाये हुए बोझ को या तुम्हारे द्वारा पहने हुए तमगे को सलाम करती हे ...जो की नदी के किनारे जाने पे उतर जाने हैं ..पर अब क्या अब तो बंशी को सलाम पाने की आदत हो गई थी ..
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