Saturday, 24 December 2011

अपना दिल न जलाओ..अक्ल लगाओ


राजेंद्र नाम ही गलत हे उसने मुझसे कहा..मेने पूछा क्यों भाई नाम तो बड़ा सही हे ..राजा इन्द्र से बना हे तुम्हारा नाम I
"हाँ सही हे ..और इन्द्र के घर में आग भी लगने वाली हे थोड़ी देर में ..खुद में ही लगाऊंगा " राजा इन्द्र"..तुम देखते रहो बस I
मैं फिर पूछ बैठा भाई ऐसा क्या हो गया की तुम अपने घर में आग लगा रहे हो I
यार दीपक तुम्हे दीखता नही कितना कूड़ा इखत्ता हो गया हे घर में ..
मेने कहा ..तो इसे हटाने के और भी तरीके हैं I
"यही कहोगे न की साफ करलो " वो तपाक से बोल उठा .
मेने कहा हाँ कर सकते हो ...भाई ये जीतेन्द्र, रमेश और रिंकू के घर हैं न हमारे पडोस में ..वह से आता हे ये कूड़ा I
कब तक साफ करूंगा ..इसीलिए सोच रहा हु आग ही लगा देता हु आँगन में जेसे ही कूड़ा आये साफ.
मेने कहा यार तो और भी तरीके हैं इससे निज़ात पाने के I
" बोलो तुम भी अपनी राय देलो .. तुम्हारा भी मन हल्का हो जायेगा.. रायचन्दो की कमी नही हे ..चिडते हुए बोला I
में भी कहाँ मानने वाला था नेक विचार रखने से ...बोला
यार एसा कर सकते हो की
एक चारदीवारी बना लो ..कूड़ा आने का सवाल ही नही
या
एसा करो की पड़ोसियों को समझाओ की उनके घर का कूड़ा साफ करे ..आदत डाले I
और
इतने ही गुस्से में हो तो कुछ एसा करो की ..वो लोग अपने घर में आग लगाये उनके घर की गंदगी के लिए अपने घर में आग ...समझदार तो एसा नही करेंगे कभी

बाकि रुम्हारी मर्जी राजेंद्र भाई ..में चलता हु वरना घर में टाइम पे नही पहुंचा तो वहा आग लग जाएगी हेहे ...


क्या सीखा :
दोस्तों हम सब ये खूब करते हे ,,,कोई और बुरा आदमी हे तो हम परेसान  हो जाते हे..अक्सर अपने दिल में आग लगा के घूमते रहते हे ,,की फ़लाने की वजह से मेरा दिमाग गरम हो रहा हे ....में परेशान हु की वो कितना बुरा आदमी हे..क्या फर्क हे ..राजेंद्र में और हममे ..जानता हु तुम मुझे रायचंद कहोगे ..हेहे कोई नही कहलो .. पर मेरी सब राजेन्द्रो से ,,यही सलाह हे ...गेरो की गलती को लेके ..अपने घर ( दिल ) में आग न लगाओ ..अक्ल लगाओ अक्ल लगाओ ...@learn from stories ,,,

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